जानिए हरिद्वार स्थित दक्षिण काली मंदिर के विषय में || Know about Dakshin Kali Temple located in Haridwar
देवभूमि उत्तराखंड अपने प्राचीन मंदिरों, पौराणिक स्थलों, धार्मिक स्थलों तथा प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। उत्तराखंड में जहां एक और ऊंचे ऊंचे पहाड़ है वहीं दूसरी ओर हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थल भी हैं जो कि मनुष्य को आध्यात्मिक से जोड़ते हैं इसी कड़ी में आज हम आपको उत्तराखंड के एक प्रसिद्ध मंदिर दक्षिण काली मंदिर के विषय में बताने जा रहे हैं जो की हरिद्वार में स्थित है और यह मंदिर माता काली को समर्पित है, दक्षिण काली मंदिर में मूर्ति की स्थापना कोलकाता के शिव भक्त कामराज गुरु की थी ।
किसने किया दक्षिण काली मंदिर का निर्माण ?
ऐसा कहा जाता है कि दक्षिण काली मंदिर की स्थापना कोलकाता के सिद्ध पुरुष कामराज महाराज ने की थी और उन्हें मंदिर का निर्माण करने का आदेश स्वयं माता काली ने दिया था इस मंदिर की स्थापना 108 न मंडों पर की गई थी तथा मां काली एवं भैरव बाबा को इस मंदिर में स्थापित किया गया
दक्षिण काली मंदिर की पौराणिक मान्यता ।
स्कंद पुराण के अनुसार स्वयं काल भैरव इस मंदिर की रक्षा करते हैं इस मंदिर को कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर के समकक्ष भी माना जाता है ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं विशेष रूप से शनिवार के दिन भक्त यहां पूजा अर्चना करने आते हैं और खिचड़ी का भोग लगाते हैं।
इस मंदिर के गर्भ ग्रह में एक विशाल हवन कुंड भी है जहां माता के नौ रूपों का चित्रण किया गया है ऐसा भी कहा जाता है कि इस मंदिर के प्रांगण में काले और सफेद रंग के नाग नागिन का जोड़ा रहता है जिन्हें सावन के दिनों में देखा जा सकता है।
क्यों कहा जाता है इसे दक्षिण काली मंदिर?
अक्सर मंदिरों के नाम वहां की मूर्ति अथवा स्थान की विशेषता के आधार पर रखे जाते हैं परंतु दक्षिण काली मंदिर में माता की मूर्ति पूर्व दिशा में है फिर भी इसे दक्षिण काली मंदिर कहा जाता है, इसे दक्षिण काली मंदिर कहे जाने का एक कारण यह भी है क्योंकि गंगा नदी इस मंदिर के ठीक दक्षिण दिशा में बहती है।
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